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बेट द्वारका हनुमान दंडी मंदिर, गुजरात
द्वारका से चार मील की दूरी पर बेटद्वारका हनुमान दंडी मंदिर स्थित है। इस स्थान पर मकर ध्वज के साथ में हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। कहते हैं कि पहले मकरध्वज की मूर्ति छोटी थी परंतु अब दोनों मूर्तियां एक सी ऊंची हो गई हैं। इस मंदिर को दांडी हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां पहली बार हनुमानजी अपने पुत्र मकरध्वज से मिले थे। मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही सामने हनुमान पुत्र मकरध्वज की प्रतिमा है, वहीं पास में हनुमानजी की प्रतिमा भी स्थापित है। इन दोनों प्रतिमाओं की विशेषता यह है कि इन दोनों के हाथों कोई भी शस्त्र नहीं है और ये आनंदित मुद्रा में है। यह मंदिर 500 वर्ष पुराना है। भारत में यह पहला मंदिर जहाँ हनुमानजी और मकरध्वज (पिता -पुत्र) का मिलन दिखाया गया है। जब हनुमानजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेने के लिए आए, तब उनका मकरध्वज के साथ घोर युद्ध हुआ। कुछ धर्म ग्रंथों में मकरध्वज को हनुमानजी का पुत्र बताया गया है, जिसका जन्म हनुमानजी के पसीने द्वारा एक मछली से हुआ था। कहते हैं कि पहले हिंदू धर्म को मानने वाले ये बात बहुत अच्छी तरह से जानते...
संकट मोचन महाबली हनुमान मंदिर
भगवान हनुमान की 67 फीट ऊँची मूर्तिकला संकट मोचन श्री हनुमान मंदिर में स्थित है; फिल्लौर शहर भारत के पंजाब राज्य में जालंधर जिले के अंतर्गत आता है। यह जिला हेड क्वार्टर जालंधर से लगभग 47 किलोमीटर और लुधियाना से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित है। फिल्लौर लुधियाना और जालंधर छावनी की सीमा रेखा पर रेलवे जंक्शन है। लोकप्रिय हिंदू भजन, जय जगदीश हरे की रचना एक स्थानीय विद्वान शारदा राम फिल्लौरी ने फिल्लौर से किसी समय 1870 में की थी। शारदा राम फिल्लौरी ने यह भी लिखा कि आमतौर पर हिंदी में पहला उपन्यास क्या माना जाता है। 67 फीट हनुमान प्रतिमा, संकट मोचन श्री हनुमान मंदिर, फिल्लौर, पंजाब फिल्लौर सिटी, फिल्लौर 144410


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