The temple is situated on the road coming from Bilaspur to Chhachhrauli, 4 km away from Bilaspur and it attracts large number of people. Address : Model Colony, Haryana 135001
हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं, सब रटा रटाया। क्या हमे चालीसा पढते समय पता भी होता है कि हम हनुमानजी से क्या कह रहे हैं या क्या मांग रहे हैं? बस रटा रटाया बोलते जाते हैं। आनंद और फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो। तो लीजिए पेश है श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित!! ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि। 📯 《अर्थ》→ गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।★ ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।★ 📯 《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन.करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।★ ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥★ 📯 《अर्थ 》→ श्र...
अनोखी मूरत, पूजा की अनोखी विधि और उस पर भक्तों का अलग-अलग चढ़ावा. उज्जैन के अखंड ज्योति मंदिर में भक्तों को हनुमान का चमत्कार दिखाई देता है. जहां एक तरफ मंदिर में जल रही अखंड ज्योति के दर्शन कर आटे का दीया जलाने भर से साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाती है, वहीं अन्य मनोकामनाओं के लिए भक्त बजरंगबली को अलग-अलग प्रसाद का भोग लगाते हैं. अनोखी रस्म है, बजरंगबली के दरबार में गुहार लगाने का रिवाज भी अनोखा है. अनंत आस्था से श्रद्धालु पवनपुत्र से विनती करते हैं. यहां पवनपुत्र सुनते हैं अपने भक्तों की पुकार और भक्तों का कल्याण करते हैं. महाकाल की नगरी उज्जैन के अखंड ज्योति मंदिर में बजरंगबली की मूर्ति से लेकर यहां होने वाली पूजा की बात निराली है. जहां एक तरफ बजरंगबली की सिंदूरी प्रतिमा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है तो वहीं दूसरी ओर उनके पांव के नीचे दबी लंकिनी राक्षसी उनके पराक्रम की कहानी सुनाती है. कहते हैं लक्ष्मण को बचाने के लिए जब हनुमान संजीवनी लेकर आ रहे थे तो लंकिनी नाम की राक्षसी ने उनका रास्ता रोक कर उन्हें जाने से रोका, जिसके बाद हनुमान, लंकिनी को अपने पैरों के नीचे दबाकर आगे...
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