श्री पंचमुख आंजनेयर हनुमान, तमिलनाडू तमिलनाडू के कुम्बकोनम नामक स्थान पर श्री पंचमुखी आंजनेयर स्वामी जी (श्री हनुमान जी) का बहुत ही मनभावन मठ है। यहाँ पर श्री हनुमान जी की "पंचमुख रूप" में विग्रह स्थापित है, जो अत्यंत भव्य एवं दर्शनीय है। यहाँ पर प्रचलित कथाओं के अनुसार जब अहिरावण तथा उसके भाई महिरावण ने श्री राम जी को लक्ष्मण सहित अगवा कर लिया था, तब प्रभु श्री राम को ढूँढ़ने के लिए हनुमान जी ने पंचमुख रूप धारण कर इसी स्थान से अपनी खोज प्रारम्भ की थी। और फिर इसी रूप में उन्होंने उन अहिरावण और महिरावण का वध भी किया था। यहाँ पर हनुमान जी के पंचमुख रूप के दर्शन करने से मनुष्य सारे दुस्तर संकटों एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है।
अनोखी मूरत, पूजा की अनोखी विधि और उस पर भक्तों का अलग-अलग चढ़ावा. उज्जैन के अखंड ज्योति मंदिर में भक्तों को हनुमान का चमत्कार दिखाई देता है. जहां एक तरफ मंदिर में जल रही अखंड ज्योति के दर्शन कर आटे का दीया जलाने भर से साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाती है, वहीं अन्य मनोकामनाओं के लिए भक्त बजरंगबली को अलग-अलग प्रसाद का भोग लगाते हैं. अनोखी रस्म है, बजरंगबली के दरबार में गुहार लगाने का रिवाज भी अनोखा है. अनंत आस्था से श्रद्धालु पवनपुत्र से विनती करते हैं. यहां पवनपुत्र सुनते हैं अपने भक्तों की पुकार और भक्तों का कल्याण करते हैं. महाकाल की नगरी उज्जैन के अखंड ज्योति मंदिर में बजरंगबली की मूर्ति से लेकर यहां होने वाली पूजा की बात निराली है. जहां एक तरफ बजरंगबली की सिंदूरी प्रतिमा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है तो वहीं दूसरी ओर उनके पांव के नीचे दबी लंकिनी राक्षसी उनके पराक्रम की कहानी सुनाती है. कहते हैं लक्ष्मण को बचाने के लिए जब हनुमान संजीवनी लेकर आ रहे थे तो लंकिनी नाम की राक्षसी ने उनका रास्ता रोक कर उन्हें जाने से रोका, जिसके बाद हनुमान, लंकिनी को अपने पैरों के नीचे दबाकर आगे...
हनुमान चालीसा की रचना के पीछे एक बहुत जी रोचक कहानी है जिसकी जानकारी शायद ही किसी को हो। आइये जानते हैं हनुमान चालीसा की रचना की कहानी :- ये बात उस समय की है जब भारत पर मुग़ल सम्राट अकबर का राज्य था। सुबह का समय था एक महिला ने पूजा से लौटते हुए तुलसीदास जी के पैर छुए। तुलसीदास जी ने नियमानुसार उसे सौभाग्यशाली होने का आशीर्वाद दिया। आशीर्वाद मिलते ही वो महिला फूट-फूट कर रोने लगी और रोते हुए उसने बताया कि अभी-अभी उसके पति की मृत्यु हो गई है। इस बात का पता चलने पर भी तुलसीदास ज ी जरा भी विचलित न हुए और वे अपने आशीर्वाद को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे। क्योंकि उन्हें इस बात का ज्ञान भली भाँति था कि भगवान राम बिगड़ी बात संभाल लेंगे और उनका आशीर्वाद खाली नहीं जाएगा। उन्होंने उस औरत सहित सभी को राम नाम का जाप करने को कहा। वहां उपस्थित सभी लोगों ने ऐसा ही किया और वह मरा हुआ व्यक्ति राम नाम के जाप आरंभ होते ही जीवित हो उठा। यह बात पूरे राज्य में जंगल की आग की तरह फैल गयी। जब यह बात बादशाह अकबर के कानों तक पहुंची तो उसने अपने महल में तुलसीदास को बुलाया और भरी सभा में उनकी परीक्षा ...
Comments
Post a Comment