Posts

हनुमान जी का यह मंत्र, अतिशीघ्र होते हैं प्रसन्न

Image
श्री राम के परम भक्त हनुमान जी महाराज आठ चिरंजीवियों में से एक है| हनुमान जी जल्द ही प्रसन्न होने वाले देवताओं में से एक हैं और इसके लिए कुछ चमत्कारी मंत्र यहांं बताए जा रहे हैं |  देवताओं में भगवान शिव के बाद बजरंगी बली ही ऐसे देवता हैं, जो अपने भक्तों पर अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं. छोटे-छोटे उपायों व मंत्रों से हनुमान जी प्रसन्न हो जाते हैं. सच्चे मन से श्रद्धापूर्वक की गई पूजा कभी बेकार नहीं जाती |  ऐसे ही उपायों में से एक है हनुमत कवच | इसमें अपार शक्ति है साथ ही अद्भुत फलदायी है | हम आपको बता दें कि इसे खुद भगवान श्रीराम ने रचा है | इतना ही नहीं, इस हनुमत कवच का पाठ प्रभु श्रीराम ने स्वयं रावण से युद्ध करते समय किया था | नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट । लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट ॥‘ नाम पाहरू दिवस निसि ‘ ….. सीता जी के चारों तरफ आप के नाम का पहरा है । क्योंकि वे रात दिन आप के नाम का ही जप करती हैं । सदैव राम जी का ही ध्यान धरती हैं और जब भी आँखें खोलती हैं तो अपने चरणों में नज़र टिकाकर आप के चरण कमलों को ही याद क...

श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच – हिन्दी अर्थ

॥हरि: ॐ ॥   ॥श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच ॥   (मूल संस्कृत और हिन्दी अर्थ)   ॥अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥    श्रीगणेशाय नम:|  ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:| गायत्री छंद:| पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता| ह्रीम् बीजम्| श्रीम् शक्ति:| क्रौम् कीलकम्| क्रूम् कवचम्| क्रैम् अस्त्राय फट् | इति दिग्बन्ध:|  इस स्तोत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता पंचमुख-विराट-हनुमानजी हैं, ह्रीम् बीज है, श्रीम् शक्ति है, क्रौम् कीलक है, क्रूम् कवच है और ‘क्रैम् अस्त्राय फट्’ यह दिग्बन्ध है| ॥श्री गरुड उवाच ॥ अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि शृणु सर्वांगसुंदर| यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमत: प्रियम् ॥१॥   गरुडजी ने कहा – हे सर्वांगसुंदर, देवाधिदेव के द्वारा, उन्हें प्रिय रहने वाला जो हनुमानजी का ध्यान किया गया, उसे स्पष्ट करता हूँ, सुनो|  पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम्| बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम् ॥​२​॥   पाँच मुख वाले, अत्यन्त विशाल रहने वाले, तीन गुना पाँच  यानी पंद्रह नेत्र (त्रि-पञ्च-नयन) रहने ...

उज्जैन के अखंड ज्‍योति मंदिर

Image
अनोखी मूरत, पूजा की अनोखी विधि और उस पर भक्तों का अलग-अलग चढ़ावा. उज्जैन के अखंड ज्‍योति मंदिर में भक्तों को हनुमान का चमत्कार दिखाई देता है. जहां एक तरफ मंदिर में जल रही अखंड ज्योति के दर्शन कर आटे का दीया जलाने भर से साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाती है, वहीं अन्य मनोकामनाओं के लिए भक्त बजरंगबली को अलग-अलग प्रसाद का भोग लगाते हैं. अनोखी रस्म है, बजरंगबली के दरबार में गुहार लगाने का रिवाज भी अनोखा है. अनंत आस्था से श्रद्धालु पवनपुत्र से विनती करते हैं. यहां पवनपुत्र सुनते हैं अपने भक्तों की पुकार और भक्तों का कल्याण करते हैं. महाकाल की नगरी उज्जैन के अखंड ज्योति मंदिर में बजरंगबली की मूर्ति से लेकर यहां होने वाली पूजा की बात निराली है. जहां एक तरफ बजरंगबली की सिंदूरी प्रतिमा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है तो वहीं दूसरी ओर उनके पांव के नीचे दबी लंकिनी राक्षसी उनके पराक्रम की कहानी सुनाती है. कहते हैं लक्ष्मण को बचाने के लिए जब हनुमान संजीवनी लेकर आ रहे थे तो लंकिनी नाम की राक्षसी ने उनका रास्ता रोक कर उन्हें जाने से रोका, जिसके बाद हनुमान, लंकिनी को अपने पैरों के नीचे दबाकर आगे...

हनुमान बाहुक

छप्पय सिंधु तरन, सिय-सोच हरन, रबि बाल बरन तनु । भुज बिसाल, मूरति कराल कालहु को काल जनु ॥ गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव । जातुधान-बलवान मान-मद-दवन पवनसुव ॥ कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित सन्तत निकट । गुन गनत, नमत, सुमिरत जपत समन सकल-संकट-विकट ॥१॥ स्वर्न-सैल-संकास कोटि-रवि तरुन तेज घन । उर विसाल भुज दण्ड चण्ड नख-वज्रतन ॥ पिंग नयन, भृकुटी कराल रसना दसनानन । कपिस केस करकस लंगूर, खल-दल-बल-भानन ॥ कह तुलसिदास बस जासु उर मारुतसुत मूरति विकट । संताप पाप तेहि पुरुष पहि सपनेहुँ नहिं आवत निकट ॥२॥ झूलना पञ्चमुख-छःमुख भृगु मुख्य भट असुर सुर, सर्व सरि समर समरत्थ सूरो । बांकुरो बीर बिरुदैत बिरुदावली, बेद बंदी बदत पैजपूरो ॥ जासु गुनगाथ रघुनाथ कह जासुबल, बिपुल जल भरित जग जलधि झूरो । दुवन दल दमन को कौन तुलसीस है, पवन को पूत रजपूत रुरो ॥३॥ घनाक्षरी भानुसों पढ़न हनुमान गए भानुमन, अनुमानि सिसु केलि कियो फेर फारसो । पाछिले पगनि गम गगन मगन मन, क्रम को न भ्रम कपि बालक बिहार सो ॥ कौतुक बिलोकि लोकपाल हरिहर विधि, लोचननि चकाचौंधी चित्तनि खबार सो। बल कैंधो बीर रस ध...